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कर्नाटक: प्रतिबंधित चीनी मांझे की बिक्री पर राज्यव्यापी कार्रवाई की मांग
कर्नाटक पशु क्रूरता निवारण संगठन ने चीनी मांझे के उपयोग और बिक्री पर राज्य स्तर पर सख्त कार्रवाई की अपील की है। पक्षियों को नुकसान पहुंचाने वाले प्रतिबंधित उत्पाद की रोकथाम के लिए संगठन ने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
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कर्नाटक पशु क्रूरता निवारण संगठन (KSPCA) ने राज्य सरकार से चीनी मांझे की बिक्री और उपयोग पर व्यापक प्रतिबंध लगाने के लिए कहा है। संगठन का कहना है कि यह प्रतिबंधित उत्पाद पक्षियों के लिए गंभीर खतरा पैदा करता है और हजारों पक्षियों की मौत का कारण बनता है।
चीनी मांझा, जो पतंगबाजी के दौरान इस्तेमाल होता है, आमतौर पर कांच के कणों के साथ लेपित होता है। KSPCA के अनुसार, इस मांझे के संपर्क में आने वाले पक्षियों को गंभीर चोटें आती हैं और कई बार जानलेवा साबित होती है।
संगठन ने विभिन्न बाजारों और दुकानों में इस प्रतिबंधित उत्पाद की खुली बिक्री पर चिंता व्यक्त की है। KSPCA का तर्क है कि वर्तमान कानूनों को प्रभावी ढंग से लागू नहीं किया जा रहा है और इसके कारण पशु क्रूरता में वृद्धि हो रही है।
संगठन ने कर्नाटक सरकार से मांग की है कि वह पशु कल्याण कानूनों को सख्ती से लागू करे और चीनी मांझे की बिक्री करने वाले विक्रेताओं के खिलाफ कार्रवाई करे। KSPCA का कहना है कि केवल सचेतन अभियान और कानूनी कार्रवाई से ही इस समस्या का समाधान संभव है।