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नशा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा का 26 दिन बाद अंतिम संस्कार
चंडीगढ़ के PGI से लाए गए परविंदर सिंह झोटा का अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव मानसा में किया गया। परिवार ने उनकी मृत्यु को राजनीतिक साजिश बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।
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नशे के खिलाफ अभियान चलाने वाले सामाजिक कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा का अंतिम संस्कार शुक्रवार को उनके ही खेत में किया गया। चंडीगढ़ के पीजीआई हॉस्पिटल से उनका पार्थिव शरीर मानसा लाया गया, जहां हजारों समर्थकों ने फूलों की वर्षा करके उन्हें अंतिम विदाई दी।
झोटा की मृत्यु को लेकर उनके परिवार ने गंभीर आरोप लगाए हैं। परिवार के सदस्यों का कहना है कि यह एक राजनीतिक साजिश का परिणाम है और उनकी मृत्या की परिस्थितियां संदिग्ध हैं। झोटा के पिता ने इस मामले में पूरी तरह निष्पक्ष जांच की मांग की है।
झोटा के पिता ने स्थानीय पुलिस अधीक्षक के तबादले की भी मांग की है, जिससे पता चलता है कि परिवार को स्थानीय प्रशासन पर भरोसा नहीं है। उन्होंने झोटा को एक शहीद बताया है जो समाज में व्याप्त नशे की समस्या के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे थे।
यह घटना उत्तरी भारत में सामाजिक कार्यकर्ताओं की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर से सवाल खड़े करती है। मामला गंभीर है और इसमें तुरंत उच्च स्तरीय जांच की आवश्यकता है।