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अरुणाचल के वन अधिकारी ने शुरू किया 'वन्यजीवन कक्षा' कार्यक्रम
कमलांग टाइगर रिज़र्व के एक वन अधिकारी ने छात्रों को प्रकृति के बीच सीधे शिक्षा प्रदान करने के लिए 'वन्यजीवन कक्षा' की शुरुआत की है। यह अभिनव पहल जैव विविधता संरक्षण और मानव-वन्यजीवन सहअस्तित्व की व्यावहारिक समझ विकसित करने पर केंद्रित है।
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अरुणाचल प्रदेश के कमलांग टाइगर रिज़र्व में एक वन अधिकारी ने पारंपरिक कक्षा शिक्षा से परे एक अभिनव कार्यक्रम शुरू किया है। 'वन्यजीवन कक्षा' नामक यह पहल छात्रों को वन क्षेत्र में सीधे प्रशिक्षण देकर जैविक विविधता की गहन समझ प्रदान करती है।
इस कार्यक्रम के माध्यम से छात्र वन्यजीवन संरक्षण की महत्ता, पारिस्थितिकी तंत्र के कार्य और वन्यजीवों के आवास के बारे में व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त करते हैं। वास्तविक वन परिवेश में होने वाली यह शिक्षा पारंपरिक पाठ्यपुस्तकों की तुलना में अधिक प्रभावी साबित हुई है।
कार्यक्रम का एक प्रमुख उद्देश्य मानव और वन्यजीवन के बीच सामंजस्यपूर्ण सहअस्तित्व की संस्कृति विकसित करना है। छात्र इस दौरान सीखते हैं कि कैसे स्थानीय समुदाय वन्यजीवन संरक्षण में भूमिका निभा सकते हैं और टाइगर रिज़र्व जैसे संरक्षित क्षेत्रों का महत्व क्या है।
इस तरह की व्यावहारिक शिक्षा पद्धति पूर्वोत्तर भारत में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, जहां जैव विविधता संरक्षण और स्थानीय समुदायों की आजीविका के बीच संतुलन आवश्यक है।