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2026 में एशिया वैश्विक विकास का 59% योगदान देगा, भारत 7.3% बढ़ेगा
संयुक्त राष्ट्र व्यापार और विकास सम्मेलन ने 2026 में वैश्विक आर्थिक विकास दर 2.6% रहने का अनुमान लगाया है, जो 2025 के 2.9% से कम है। भूराजनीतिक तनाव और ऊर्जा संकट से वैश्विक अर्थव्यवस्था में मंदी आने का संकेत है।
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विश्व व्यापार संगठन के विश्लेषण में एशिया क्षेत्र की आर्थिक शक्ति लगातार बढ़ते हुए दिख रही है। आने वाले वर्ष में वैश्विक आर्थिक वृद्धि में एशिया का योगदान 59 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है। इस क्षेत्र में भारत की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण बनी हुई है, जहां की अर्थव्यवस्था 7.3 प्रतिशत की दर से विस्तार करेगी।
2026 में वैश्विक अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर में कमी के पीछे कई कारण हैं। भू-राजनीतिक द्वंद्व, ऊर्जा बाजार में अस्थिरता और विकसित तथा विकासशील देशों के बीच आय की खाई बढ़ना मुख्य कारक हैं। ये चुनौतियां समग्र आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित कर रही हैं।
भारत की 7.3 प्रतिशत की वृद्धि दर इसे विश्व की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शीर्ष स्थान पर रखती है। देश की जनसंख्या, बढ़ती खपत और निवेश इसकी शक्तिशाली प्रदर्शन के प्रमुख कारण हैं। एशियाई क्षेत्र की समग्र गतिविधि भारत के समावेश से काफी हद तक संचालित हो रही है।
आने वाले महीनों में विश्व अर्थव्यवस्था किस दिशा में बढ़ेगी, यह अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और नीतिगत निर्णयों पर निर्भर करेगा। एशियाई देशों को अपनी आंतरिक शक्तियों का उपयोग करते हुए क्षेत्रीय एवं वैश्विक चुनौतियों का सामना करना होगा।