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वैज्ञानिकों ने पहचाना वह मशरूम जो रंगीन छोटी मानव आकृतियों के दर्शन कराता है
लनमाओआ एशिएटिका नामक मशरूम प्रजाति और मतिभ्रम के बीच दिलचस्प संबंध का खुलासा हुआ है। चीन और फिलीपींस के उपयोगकर्ताओं में छोटी आकृतियों के साझा दर्शन की रिपोर्ट मिली है।
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वैज्ञानिकों ने एक दुर्लभ मशरूम प्रजाति की पहचान की है जो उपभोक्ताओं में विलक्षण मतिभ्रम का कारण बनती है। लनमाओआ एशिएटिका नामक यह प्रजाति एशिया के विभिन्न क्षेत्रों में पाई जाती है और इसके सेवन से सैकड़ों छोटी, रंगीन मानव आकृतियों के दर्शन होते हैं।
चीन और फिलीपींस में इस मशरूम के उपयोगकर्ताओं ने लगभग समान प्रकार के दृश्य अनुभव किए हैं। ये अनुभव सांस्कृतिक सीमाओं को पार करते हुए कई संस्कृतियों में साझा मतिभ्रम की घटना को दर्शाते हैं। शोधकर्ताओं के अनुसार यह समानता संभवतः मशरूम के जैव रासायनिक गुणों से जुड़ी है।
यद्यपि इस मशरूम के हलूसिनोजेनिक प्रभावों की जांच वर्ष 1934 से चली आ रही है, किंतु आधुनिक मशरूम वर्गीकरण तकनीकों के विकास से नई जैविक जानकारियां सामने आई हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि इस प्रजाति में पाए जाने वाले रासायनिक यौगिक ही इन विशिष्ट मतिभ्रमों के लिए जिम्मेदार हैं।
यह खोज न केवल कवक विज्ञान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण है, बल्कि यह मस्तिष्क और मतिभ्रम के संबंध को समझने में भी मदद कर सकती है। शोधकर्ताओं का कहना है कि ऐसी समानांतर अनुभूतियों का अध्ययन मानव तंत्रिका विज्ञान की गहरी समझ प्रदान करता है।