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असम सरकार पर चरागाह भूमि कॉर्पोरेट हितों के लिए अधिग्रहण का आरोप
किसान संगठन ने असम सरकार पर आरोप लगाया है कि वह नदी किनारे रहने वाली समुदायों द्वारा परंपरागत रूप से उपयोग की जाने वाली चरागाह भूमि को कॉर्पोरेट हितों के लिए अधिग्रहित करने का प्रयास कर रही है।
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असम के एक किसान संगठन ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं कि वह नदी किनारे स्थित समुदायों की पारंपरिक चरागाह भूमि को कॉर्पोरेट समूहों के हाथों में देने का षड्यंत्र रच रही है। संगठन का कहना है कि यह कदम सदियों से इन भूमियों का उपयोग करने वाली समुदायों के जीविका अधिकारों का हनन करता है।
चरागाह भूमि असम के नदी किनारे रहने वाले समुदायों के लिए पशुपालन और कृषि गतिविधियों का मुख्य आधार रही है। यह भूमि पीढ़ियों से इन समुदायों द्वारा संरक्षित और उपयोग की जाती आई है, जो उनकी आजीविका और सांस्कृतिक पहचान का अभिन्न अंग है।
किसान संगठन का विचार है कि सरकार के इस कदम से न केवल स्थानीय समुदायों को भारी नुकसान होगा, बल्कि क्षेत्र की पारंपरिक आर्थिक व्यवस्था भी नष्ट हो जाएगी। संगठन ने आह्वान किया है कि सरकार को इस योजना को तुरंत वापस लेना चाहिए और समुदायों के अधिकारों की रक्षा करनी चाहिए।
यह विवाद असम में भूमि अधिग्रहण और कॉर्पोरेट विकास परियोजनाओं को लेकर बढ़ते विरोध का हिस्सा है। स्थानीय समुदायों और सरकार के बीच इस मामले पर आने वाले दिनों में तनाव बने रहने की संभावना है।