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असम में लुप्तप्राय बौनी सूअर की आबादी में नाटकीय बढ़ोतरी
असम के मुख्यमंत्री ने संरक्षण कार्यक्रम की सफलता का जश्न मनाया। कृत्रिम प्रजनन के माध्यम से विलुप्त माने जाने वाले बौनी सूअर की संख्या 1996 के छह से बढ़कर अब 194 हो गई है।
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असम सरकार ने विलुप्तप्राय बौनी सूअर की आबादी में आश्चर्यजनक वृद्धि के लिए अपनी संरक्षण पहल का श्रेय लिया है। राज्य के मुख्यमंत्री ने इस उपलब्धि को एक महत्वपूर्ण जैव विविधता विजय के रूप में प्रस्तुत किया, जो दशकों के निरंतर प्रयासों का परिणाम है।
कृत्रिम प्रजनन कार्यक्रम के तहत बौनी सूअर की संख्या में यह उल्लेखनीय उछाल असम के वन्यजीव संरक्षण विभाग की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। 1996 में जब मात्र छह व्यक्तियों की आबादी बची थी, तब विशेषज्ञ इस प्रजाति को लगभग विलुप्त मान चुके थे। आज तीन दशक से अधिक समय बाद संख्या 194 तक पहुंच गई है।
यह प्रजाति पृथ्वी पर सबसे छोटे सूअर प्रजातियों में से एक मानी जाती है। भारत में इसका अस्तित्व मुख्यतः असम के बाहरी क्षेत्रों तक सीमित रहा है। संरक्षण विशेषज्ञों के अनुसार, यह सफलता न केवल प्रजाति के संरक्षण के लिए बल्कि पूरे क्षेत्र की पारिस्थितिकी तंत्र के लिए भी महत्वपूर्ण है।
असम सरकार के अधिकारियों ने कहा है कि इस कार्यक्रम में आगे और भी सुधार की गुंजाइश है। बौनी सूअर की आबादी को और भी मजबूत करने के लिए संरक्षण प्रयास जारी रखे जाएंगे। यह पहल अन्य संकटग्रस्त जंगली प्रजातियों के संरक्षण के लिए एक अनुकरणीय उदाहरण बन गई है।