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असमिया फिल्म 'रादोर पक्षी' को मास्को फेस्टिवल में विशेष जूरी पुरस्कार
असम की एक लेखिका की जीवन यात्रा पर बनी फिल्म 'रादोर पक्षी' को अंतरराष्ट्रीय मंच पर सम्मानित किया गया है। रीढ़ की हड्डी से जुड़ी दुर्लभ बीमारी से जूझती हुई भी इस लेखिका ने अपने सपनों का पीछा किया।
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असम से निर्मित फिल्म 'रादोर पक्षी' को मास्को अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में विशेष जूरी पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। यह फिल्म असम की एक प्रतिष्ठित लेखिका की प्रेरक जीवन गाथा पर आधारित है, जिन्होंने स्पाइनल मस्क्यूलर एट्रोफी नामक गंभीर बीमारी के साथ रहते हुए साहित्य की दुनिया में अपना योगदान दिया है।
यह बीमारी धीरे-धीरे शरीर की मांसपेशियों को कमजोर करती है, लेकिन इस लेखिका ने इस चुनौती को अपने रचनात्मक कार्य में बाधा नहीं बनने दिया। फिल्म में उनके दृढ़ संकल्प, साहस और साहित्य के प्रति निष्ठा को दर्शाया गया है, जो किसी भी सामान्य इंसान को प्रेरित कर सकता है।
मास्को में यह मान्यता असमिया सिनेमा के लिए एक महत्वपूर्ण पहचान है। इस तरह की कहानियां न केवल क्षेत्रीय फिल्म उद्योग को बल देती हैं, बल्कि वैश्विक दर्शकों तक भारतीय संस्कृति और मानवीय मूल्यों का संदेश भी पहुंचाती हैं।
इस पुरस्कार के माध्यम से 'रादोर पक्षी' अंतरराष्ट्रीय फिल्म सर्किट में एक महत्वपूर्ण स्थान बनाता है और असमिया फिल्म निर्माताओं की प्रतिभा का प्रमाण है।