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विधानसभा में मंत्रियों की घोषणाओं का समय बदलने पर विवाद
विधानसभा अध्यक्ष ने मंत्रियों से अनुदान की मांग पर बहस से पहले विभागीय घोषणाएं करने का सुझाव दिया है। इस प्रस्ताव को लेकर सदन में अलग-अलग मत सामने आए हैं।
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विधानसभा में परंपरागत प्रक्रिया को बदलने के अध्यक्ष के प्रस्ताव को लेकर असहमति सामने आई है। जे.सी.डी. प्रभाकर ने सुझाव दिया है कि मंत्रियों को अनुदान की मांग पर बहस होने से पहले ही विभागीय स्तर पर नई पहल की घोषणाएं करनी चाहिए।
वर्तमान प्रणाली में मंत्री बहस और जवाबी बयान के बाद अपनी घोषणाएं करते हैं। अध्यक्ष के सुझाव के अनुसार यह क्रम उलट दिया जाए और घोषणाएं बहस से पहले की जाएं। इससे सदन में बहस के दौरान इन नई पहलों पर विस्तारपूर्वक चर्चा की जा सकेगी।
विधानसभा सदस्यों की ओर से इस प्रस्ताव के लिए अलग-अलग प्रतिक्रियाएं आई हैं। कुछ सदस्यों का मानना है कि यह संसदीय प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बना सकता है, जबकि अन्य परंपरागत तरीके को बनाए रखने के पक्ष में हैं।
यह बहस दक्षिण भारतीय विधानसभाओं में प्रक्रिया संबंधी मुद्दों पर बढ़ती चिंता को दर्शाती है। सदन के नियमों में किसी भी संशोधन को आगे बढ़ने से पहले सभी पक्षों की सहमति की आवश्यकता होगी।