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असोचैम ने 1.5 ट्रिलियन रुपये के सीमा शुल्क विवादों निपटाने के लिए माफी योजना का प्रस्ताव किया
वाणिज्य संगठन असोचैम ने बजट से पहले एक बार की सीमा शुल्क माफी योजना का प्रस्ताव किया है। यह कदम लंबित हजारों करोड़ रुपये के विवादों को सुलझाने में मदद कर सकता है।
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भारतीय उद्योग संगठन असोचैम ने आगामी बजट के लिए अपनी अनुशंसाएं प्रस्तुत करते हुए सरकार से एक व्यापक सीमा शुल्क माफी योजना शुरू करने का आग्रह किया है। संगठन के अनुसार, यह एकमुश्त योजना लगभग 1.5 ट्रिलियन रुपये के लंबित सीमा शुल्क विवादों को निपटाने में सहायक साबित हो सकती है।
अपने बजट पूर्व ज्ञापन में असोचैम ने निर्माताओं के लिए कर प्रोत्साहन और दीर्घकालीन पूंजी लाभ कर दरों में कमी का भी सुझाव दिया है। संगठन का मानना है कि ये उपाय वर्तमान आर्थिक चुनौतियों के बीच औद्योगिक क्षेत्र को मजबूती प्रदान कर सकते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, सीमा शुल्क से संबंधित विवाद भारतीय व्यवसायों के लिए एक प्रमुख समस्या बनी हुई है। माफी योजना के माध्यम से इन विवादों का समाधान निर्यातकों और आयातकों दोनों के लिए कारोबार में स्पष्टता ला सकता है।
देश के प्रमुख औद्योगिक निकायों में से एक असोचैम की ये सिफारिशें सरकार की आर्थिक नीति निर्माण प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। संगठन का लक्ष्य भारतीय उद्योग को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाते हुए नियामक बोझ को कम करना है।