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डायनोसॉर विलुप्त होने के बाद चींटियों के विश्व विजय में 'जंपिंग जीन्स' की भूमिका
वैज्ञानिकों के नए शोध में पता चला है कि 66 मिलियन साल पहले क्षुद्रग्रह से आई तबाही के बाद चींटियों का विकास तेजी से हुआ। चींटियों के डीएनए में मौजूद 'जंपिंग जीन्स' ने उन्हें पृथ्वी पर प्रभुत्व स्थापित करने में मदद की।
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पृथ्वी पर डायनोसॉर के विलोपन के बाद चींटियों का उदय एक उल्लेखनीय विकासवादी सफलता की कहानी है। नए वैज्ञानिक अनुसंधान से संकेत मिलता है कि इस सफलता के पीछे चींटियों के जीन में छिपे 'जंपिंग जीन्स' की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
वर्तमान में विश्व भर में 15,000 से अधिक चींटियों की प्रजातियां पहचानी गई हैं। डॉ. लुकास श्रेडर के नेतृत्व में किए गए शोध के अनुसार, जंपिंग जीन्स चींटियों के विकास और पर्यावरणीय अनुकूलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ये जीन्स डीएनए के भीतर स्वयं को स्थानांतरित कर सकते हैं और आनुवंशिक विविधता को बढ़ाते हैं।
पेलियोजीन काल की शुरुआत में इन जंपिंग जीन्स में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। इस अवधि के दौरान चींटियों की गंध संवेदी क्षमता में विकास हुआ और उनके सामाजिक संचार कौशल में भी सुधार आया। ये आनुवंशिक परिवर्तन चींटियों को विभिन्न पर्यावरणीय परिस्थितियों में जीवित रहने और फलने-फूलने का लाभ प्रदान करते हैं।
चींटियों की यह आनुवंशिक श्रेष्ठता उन्हें पृथ्वी के सबसे सफल जीवों में से एक बनाती है। उनकी विकसित संचार प्रणाली और गंध पहचान की क्षमता उन्हें भोजन खोजने, घोंसले का निर्माण करने और जटिल सामाजिक संरचनाएं विकसित करने में सक्षम बनाती है।