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गर्मी के बावजूद अगस्त में शहद की मक्खियों को भोजन की कमी का संकट
मधुमक्खी पालकों के लिए अगस्त का महीना चुनौतीपूर्ण साबित होता है क्योंकि इस दौरान फूलों की कमी के कारण शहद की मक्खियों को पर्याप्त भोजन नहीं मिल पाता। यह समस्या गर्मी के मौसम में भी बरकरार रहती है।
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भारत के कई क्षेत्रों में अगस्त का महीना शहद की मक्खियों के लिए संकटकालीन अवधि साबित होता है। जलवायु विशेषज्ञों और मधुमक्खी पालकों के अनुसार, गर्मी के मौसम में होने के बावजूद यह समय मक्खियों के लिए भोजन की कमी का कारण बनता है।
इस समस्या का मुख्य कारण इस अवधि में खिलने वाले फूलों की संख्या में अचानक गिरावट है। जुलाई में जब बारिश का प्रभाव कम होता है और अगस्त की शुरुआत में भी, कई पौधे और फूल अपने खिलने का चक्र पूरा कर लेते हैं। इससे मक्खियों को अमृत और परागकण एकत्रित करने के लिए पर्याप्त स्रोत नहीं मिलते।
मधुमक्खी पालकों को इस अवधि में अपनी बस्तियों को कृत्रिम भोजन प्रदान करना पड़ता है ताकि मक्खियों की आबादी कमजोर न हो जाए। कुछ क्षेत्रों में किसान इस समय विशेष पौधे लगाते हैं जो मक्खियों के लिए भोजन का स्रोत बन सकें।
विशेषज्ञ मानते हैं कि जलवायु परिवर्तन के कारण यह समस्या और गंभीर होती जा रही है। मधुमक्खी पालन से जुड़े लोगों को सलाह दी जाती है कि वे अगस्त में अपनी बस्तियों की निरंतर निगरानी करें और आवश्यकतानुसार पूरक आहार प्रदान करें।