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तीज श्राद्ध आज, कुतुप वेला में करें पिंडदान-तर्पण
हिंदू धर्म में पितरों को श्रद्धा देने के लिए तीज श्राद्ध को विशेष महत्व दिया जाता है। 29 सितंबर को इस अनुष्ठान के लिए कुतुप काल सुबह 11:47 बजे से दोपहर 12:35 बजे तक रहेगा।
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पितरों के प्रति श्रद्धा और समर्पण व्यक्त करने के लिए हिंदू धर्मशास्त्र में श्राद्ध कर्म को अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। तीज श्राद्ध के संदर्भ में पंचांग विशेषज्ञों के अनुसार, पिंडदान और तर्पण की विधि को पूर्ण करने के लिए कुतुप वेला सर्वोत्तम समय माना जाता है। यह समय दिन के मध्य भाग, अर्थात दोपहर के लगभग आसपास आता है।
हिंदू पंचांग के अनुसार, 29 सितंबर को तीज के श्राद्ध कार्य के लिए कुतुप काल की शुरुआत सुबह 11:47 बजे होगी और यह दोपहर 12:35 बजे तक रहेगी। इसी समयावधि में पितरों को जल, तिल और चावल का अर्पण किया जाता है। विधि-विधान से किए गए श्राद्ध कर्म को परिवार के मृत सदस्यों की आत्मा की शांति के लिए लाभकारी माना जाता है।
श्राद्ध पक्ष के दौरान किए गए पिंडदान और तर्पण की परंपरा का पालन करते हुए पारिवारिक सदस्य प्रतिदिन पितरों को याद करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, निर्धारित मुहूर्त में की गई पूजा-अर्चना से पितरों को तृप्ति मिलती है और परिवार को उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है। श्राद्ध विधि को पूर्ण करने के लिए शुद्ध मन और आस्था के साथ पवित्र स्थान पर बैठकर यह कार्य संपन्न किया जाता है।