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ऑस्ट्रेलिया ने प्लास्टिक कचरे से रेलवे स्लीपर बनाए, 50 साल टिकेंगे
ऑस्ट्रेलिया ने 2015 में एक अभिनव परियोजना शुरू की जिसमें प्लास्टिक अपशिष्ट को रेलवे स्लीपर में परिवर्तित किया गया। ये नई स्लीपर पारंपरिक लकड़ी के स्लीपर की तुलना में आधी सदी तक टिकाऊ साबित हो सकती हैं।
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ऑस्ट्रेलिया द्वारा कचरा प्रबंधन का एक उद्भावनी तरीका अपनाया गया है। देश ने प्लास्टिक कचरे को उपयोगी रेलवे स्लीपर में रूपांतरित करने की एक महत्वाकांक्षी परियोजना 2015 में शुरू की थी। यह पहल पर्यावरण संरक्षण और अपशिष्ट प्रबंधन दोनों क्षेत्रों में एक सार्थक कदम साबित हुई है।
इस परियोजना के तहत निर्मित रेलवे स्लीपर की विशेष विशेषता उनकी दीर्घायु है। पारंपरिक लकड़ी के रेलवे स्लीपर आमतौर पर 20 से 30 वर्षों तक टिकते हैं, लेकिन प्लास्टिक से बने ये स्लीपर लगभग 50 वर्षों तक उपयोग में रह सकते हैं। इससे रखरखाव की लागत में भी कमी आती है।
यह तकनीक पर्यावरणीय लाभ भी प्रदान करती है। प्लास्टिक अपशिष्ट को नष्ट न करके इसे पुनर्निर्मित उत्पादों में रूपांतरित करने से लैंडफिल में कचरा कम होता है और पुनर्चक्रण उद्योग को बल मिलता है। साथ ही, इससे नई लकड़ी की कटाई की आवश्यकता भी कम होती है।
ऑस्ट्रेलिया की इस पहल को विश्वभर में रेल परिवहन क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है। अन्य देश भी इसी प्रकार की तकनीकों को अपनाकर अपने पर्यावरणीय लक्ष्यों को प्राप्त करने का प्रयास कर रहे हैं।