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स्वायत्त टेलीकॉम नेटवर्क के लिए मानकों और नियामक समर्थन जरूरी
भारत मोबाइल कांग्रेस में उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि स्वचालित नेटवर्क दक्षता बढ़ा सकते हैं, लेकिन इसके लिए समान मानदंड, नियामक सहायता और मानवीय निरीक्षण अपरिहार्य है।
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भारत मोबाइल कांग्रेस में संगठित एक सम्मेलन में दूरसंचार उद्योग के नेताओं ने जीरो-टच स्वायत्त नेटवर्क के विकास के लिए एक सुसंगत नियामक ढांचे की मांग की है। विशेषज्ञों के अनुसार, मानव हस्तक्षेप के बिना काम करने वाले ये नेटवर्क नेटवर्क संचालन में दक्षता में उल्लेखनीय सुधार ला सकते हैं और परिचालन लागत को कम कर सकते हैं।
हालांकि, उद्योग प्रतिनिधियों ने यह भी स्पष्ट किया कि इस तकनीकी प्रगति के लिए पहले एक समान तकनीकी मानदंड स्थापित करना होगा। विभिन्न टेलीकॉम ऑपरेटरों द्वारा अपनाए गए विभिन्न मानकों से नेटवर्क सामंजस्य और अंतरसंचालनीयता में बाधा आ रही है।
नियामकीय समर्थन के अलावा, उद्योग नेताओं ने सुरक्षा उपायों और पर्यवेक्षण तंत्र की भी आवश्यकता पर बल दिया है। स्वायत्त नेटवर्क महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे का हिस्सा होने के कारण, गंभीर समस्याओं से निपटने के लिए मानवीय हस्तक्षेप की क्षमता को बनाए रखा जाना चाहिए।
विशेषज्ञों का विचार है कि भारतीय दूरसंचार आयोग को एक व्यापक नीति तैयार करनी चाहिए जो स्वायत्त नेटवर्क प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देते हुए साइबर सुरक्षा और डेटा गोपनीयता की सुरक्षा भी सुनिश्चित करे।