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आयुष शिक्षा में तेजी: तीन साल में 23 प्रतिशत की बढ़ोतरी
आयुर्वेद, योग, प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी से जुड़े कॉलेजों की संख्या 2021 से 2024 के बीच 789 से बढ़कर 971 हो गई है। इसी अवधि में प्रवेश संख्या में भी लगभग 25 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
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भारत में पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों की शिक्षा में उल्लेखनीय विस्तार देखा जा रहा है। पिछले तीन वर्षों में आयुष से संबंधित शिक्षण संस्थानों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जो सरकार की इस क्षेत्र को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
2021 में देश भर में आयुष विषयों के 789 कॉलेज थे, जो 2024 तक बढ़कर 971 तक पहुंच गए हैं। यह लगभग 23 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। प्रवेश के संदर्भ में भी समान रुझान दिखाई दिया है, जहां कुल प्रवेश संख्या 63,477 से बढ़कर 79,593 तक पहुंची है, जो लगभग 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्शाती है।
हालांकि, इस विस्तार में निजी और गैर-सरकारी कॉलेजों की भूमिका प्रमुख रही है। ये संस्थान आयुष शिक्षा क्षेत्र में बड़ी संख्या में स्थापित हो रहे हैं, जो सरकारी संस्थानों की तुलना में काफी ज्यादा हैं।
इस तेजी से विस्तार के बावजूद, शिक्षा की गुणवत्ता और मानकों को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी कॉलेजों के विस्तार और उनमें बेहतर बुनियादी ढांचे की आवश्यकता है ताकि आयुष विषयों की शिक्षा में एकरूपता और उच्च मानदंड बनाए रखे जा सकें।