World · India Bureau
गंगा जल संधि 'खामियों से भरी है', अद्यतन की जरूरत: बांग्लादेश विशेषज्ञ
बांग्लादेश नदी संरक्षण आयोग के अध्यक्ष का कहना है कि तीन दशक पुरानी गंगा जल संधि में गंभीर खामियां हैं। संधि में न तो कोई गारंटी खंड है और न ही पारिस्थितिक प्रवाह के संबंध में प्रावधान हैं।
LSN India ·

बांग्लादेश की ओर से एक महत्वपूर्ण राय सामने आई है कि भारत और बांग्लादेश के बीच 1996 में हस्ताक्षरित गंगा जल संधि में व्यापक सुधार की आवश्यकता है। बांग्लादेश नदी संरक्षण आयोग के अध्यक्ष मंजूर ए. चौधरी का मानना है कि यह संधि तीन दशकों से पुरानी हो गई है और इसमें कई गंभीर खामियां विद्यमान हैं।
चौधरी के अनुसार, संधि में सबसे बड़ी कमी यह है कि इसमें किसी भी पक्ष को कानूनी गारंटी प्रदान करने का कोई खंड नहीं है। वर्तमान समय में जलवायु परिवर्तन और जल संसाधनों के दबाव को देखते हुए ऐसा प्रावधान अत्यंत महत्वपूर्ण हो गया है। इसके अलावा, संधि में नदी के पारिस्थितिक प्रवाह और पर्यावरणीय प्रवाह से संबंधित कोई स्पष्ट दिशानिर्देश नहीं हैं।
जल विभाजन की मौजूदा संधि में गंगा नदी के जल का बंटवारा सूखे और बाढ़ के मौसम में विभिन्न हिस्सों के लिए निर्धारित है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि नदी के स्वास्थ्य को सुनिश्चित करने और जैव विविधता को संरक्षित करने के लिए एक न्यूनतम पारिस्थितिक प्रवाह बनाए रखना अत्यावश्यक है।
चौधरी का सुझाव है कि दोनों देशों को संधि की समीक्षा करने और इसे वर्तमान समय के अनुरूप बनाने की आवश्यकता है। इस तरह की समीक्षा से न केवल गंगा नदी का संरक्षण संभव होगा, बल्कि दोनों देशों के बीच जल-संबंधी विवादों को भी कम किया जा सकता है।