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आतंकवादियों के प्रत्यर्पण के लिए पासपोर्ट की जरूरत नहीं: बांग्लादेश
बांग्लादेश के मंत्री हुमायूं कबीर ने कहा कि द्विपक्षीय प्रत्यर्पण संधि के तहत अपराधियों को वापस लाया जा सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आतंकवादियों के मामले में पहचान दस्तावेज की कानूनी बाध्यता नहीं होती।
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बांग्लादेश सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री ने आतंकवाद के आरोपियों के प्रत्यर्पण से संबंधित कानूनी प्रक्रिया को स्पष्ट करते हुए कहा है कि अपराधियों को वापस लाने के लिए पासपोर्ट जैसे नियमित यात्रा दस्तावेजों की आवश्यकता नहीं होती है।
मंत्री हुमायूं कबीर ने बताया कि बांग्लादेश और भारत के बीच एक द्विपक्षीय प्रत्यर्पण संधि विद्यमान है जिसके तहत अपराधियों और आतंकवादियों को वापस लाने की प्रक्रिया संपन्न की जाती है। इस संधि के प्रावधानों के अनुसार, कानूनी कार्यवाही के दौरान सामान्य पासपोर्ट की आवश्यकता नहीं पड़ती।
कबीर के अनुसार, जब किसी व्यक्ति को आतंकवाद या अन्य गंभीर अपराधों के लिए खोजा जाता है, तो दोनों देशों की सरकारें अपनी आंतरिक कानूनी व्यवस्था और द्विपक्षीय समझौतों के तहत सीधे प्रत्यर्पण की प्रक्रिया शुरू कर सकती हैं। इसमें नागरिक यात्रा दस्तावेजों की परंपरागत आवश्यकता लागू नहीं होती।
दोनों देशों के बीच यह संधि सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा सुनिश्चित करने और आतंकवाद विरोधी प्रयासों को सशक्त बनाने के उद्देश्य से बनाई गई थी। मंत्री की टिप्पणी के जरिए बांग्लादेश सरकार यह संदेश देना चाहती है कि वह आतंकवादियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के लिए प्रतिबद्ध है।