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रोहिंग्या संकट का समाधान म्यांमार में ही संभव: बांग्लादेश पीएम
संयुक्त राष्ट्र में बांग्लादेश की प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने कहा कि विस्थापित रोहिंग्या लोगों की सुरक्षित वापसी ही इस समस्या का एकमात्र समाधान है।
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ढाका के नेतृत्व का मानना है कि रोहिंग्या संकट की समस्या का जन्म म्यांमार में हुआ है और इसीलिए इसका समाधान भी वहीं मिल सकता है। संयुक्त राष्ट्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने स्पष्ट किया कि बांग्लादेश का立ष्टिकोण इस गंभीर मानवीय संकट को हल करने के लिए अधिक व्यावहारिक और दीर्घकालिक दृष्टिकोण पर आधारित है।
बांग्लादेश सरकार का तर्क है कि हजारों रोहिंग्या शरणार्थी वर्षों से शिविरों में रह रहे हैं जिससे क्षेत्र पर भारी दबाव पड़ रहा है। प्रधानमंत्री के अनुसार, इन विस्थापित लोगों को जहां से वे आए हैं, वहीं भेजा जाना चाहिए ताकि वे अपने मूल स्थान पर पुनर्स्थापित हो सकें।
बांग्लादेश की अंतर्राष्ट्रीय अपील इस बात पर केंद्रित है कि म्यांमार को अपने नागरिकों की वापसी के लिए आवश्यक कदम उठाने चाहिए। बांग्लादेश का मत है कि केवल म्यांमार में राजनीतिक और सुरक्षा परिस्थितियों में सुधार आने से ही रोहिंग्या समुदाय सुरक्षित ढंग से अपने घरों को लौट सकता है।
यह मुद्दा दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया में सबसे बड़े मानवीय संकटों में से एक बना हुआ है। बांग्लादेश की पुकार अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से एक स्थायी और न्यायसंगत समाधान खोजने की मांग है।