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महंगे कोष में कटौती से बैंक जमा में गिरावट, क्रेडिट भी घटा
15 अगस्त तक पखवाड़े में बैंकों की कुल जमा राशि 6,534 करोड़ रुपये घटी है, जबकि साख में 70,639 करोड़ रुपये की गिरावट दर्ज की गई है। क्रेडिट-डिपॉजिट अनुपात घटकर 81.72 प्रतिशत पर आ गया है।
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बैंकिंग क्षेत्र में जमा राशि में हाल के दिनों में उल्लेखनीय गिरावट देखने को मिल रही है। पिछले पखवाड़े में बैंकों की कुल जमाराशि में 6,534 करोड़ रुपये की कमी आई है। विश्लेषकों के अनुसार यह गिरावट बैंकों द्वारा उच्च लागत वाली सामूहिक निधियों में कटौती का सीधा परिणाम है।
इसी अवधि में बैंक साख में भी उल्लेखनीय संकुचन देखा गया है। विदेशी मुद्रा गैर-निवासी खातों (एफसीएनआर) में आ रहे नए प्रवाह के बीच बैंकों ने अपनी उधार नीति में समायोजन किया है। 15 अगस्त तक के पखवाड़े में कुल साख में 70,639 करोड़ रुपये की कमी दर्ज की गई है।
बैंकिंग क्षेत्र का महत्वपूर्ण संकेतक माना जाने वाला क्रेडिट-डिपॉजिट अनुपात घटकर 81.72 प्रतिशत पर आ गया है। यह गिरावट इस बात को दर्शाती है कि बैंकों के पास जमा राशि की तुलना में अब उधार देने की गतिविधि में कमी आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि महंगी निधियों में कटौती से बैंकों की फंडिंग लागत में कमी आ सकती है, जिससे उन्हें भविष्य में अधिक प्रतिस्पर्धी ब्याज दरें प्रदान करने में मदद मिल सकती है।
आरबीआई की मौद्रिक नीति और बाजार की गतिविधियों के बीच यह संतुलन बैंकिंग क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ प्रमाणित हो सकता है। आने वाले सप्ताहों में निवेशकों और नीति निर्माताओं की नजर बैंकों की जमा राशि और साख देने की प्रवृत्ति पर केंद्रित रहेगी।