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अनुसूचित जाति के लाभार्थियों का डेटा देने के निर्देश बैंकिंग समितियों को
राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग की रिपोर्ट के बाद राज्य और केंद्रशासित प्रदेश स्तरीय बैंकिंग समितियों को नौकरी और कर्ज सहायता योजनाओं में अनुसूचित जाति के लाभार्थियों की संख्या का विवरण प्रस्तुत करने को कहा गया है।
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केंद्रीय बैंकिंग प्राधिकरण ने राज्य स्तरीय बैंकर्स समितियों (एसएलबीसी) और केंद्रशासित प्रदेश स्तरीय बैंकर्स समितियों (यूटीएलबीसी) को निर्देश दिया है कि वे अपनी समीक्षा रिपोर्टों में अनुसूचित जाति के कल्याण से जुड़ी जानकारी दर्ज करें। राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग द्वारा यह चिंता उठाई गई थी कि समुचित आंकड़ों के अभाव में वह बैंकों के प्रदर्शन की निगरानी नहीं कर पा रहा था।
इस कदम का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि रोजगार सृजन योजनाओं और ऋण सहायता कार्यक्रमों में अनुसूचित जाति समुदाय को उचित प्रतिनिधित्व मिल रहा है। बैंकिंग समितियों से अपेक्षा की जाती है कि वे लाभार्थियों की संख्या, दी गई सहायता की राशि और कार्यान्वयन की प्रगति का विस्तृत विवरण उपलब्ध कराएं।
आयोग की टिप्पणी के बाद यह निर्देश जारी किया गया है, जिसमें कहा गया था कि वर्तमान प्रणाली में पारदर्शिता की कमी है और डेटा संग्रह की व्यवस्था अधूरी है। आयोग के अनुसार, इस सूचना के बिना सामाजिक कल्याण योजनाओं की प्रभावशीलता का आकलन करना मुश्किल है।
यह कदम अनुसूचित जाति के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है। राज्य और केंद्रशासित प्रदेश स्तर पर बैंकिंग समितियों को अब त्रैमासिक और वार्षिक रिपोर्टों में यह जानकारी शामिल करनी होगी।