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नई कर्ज सुविधा में गिरावट, मौजूदा उधारकर्ताओं को प्राथमिकता: आरबीआई
भारतीय रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर ने चेतावनी दी है कि बैंकिंग तकनीक नए व्यावसायिक उधारकर्ताओं को आकर्षित करने में विफल रही है। औपचारिक ऋण प्रणाली में नए व्यावसायों का हिस्सा 2023 में 52 प्रतिशत से घटकर 2026 में 42 प्रतिशत रह गया है।
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भारतीय रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर ने बैंकों की तकनीकी क्षमता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि बैंकिंग सेक्टर की डिजिटल प्रणाली मौजूदा कर्ज लेने वालों की सेवा करने में तो कुशल है, लेकिन नए उधारकर्ताओं को आकर्षित करने में असफल साबित हुई है।
आरबीआई के आंकड़ों से चिंताजनक प्रवृत्ति सामने आई है। वित्तीय वर्ष 2022-23 में औपचारिक ऋण प्रणाली में नए व्यावसायों का प्रवेश 52 प्रतिशत था, जो वित्तीय वर्ष 2025-26 में घटकर मात्र 42 प्रतिशत रह गया है। यह दस प्रतिशत की कमी छोटे और मध्यम व्यवसायों के विकास के लिए एक बड़ी बाधा प्रस्तुत करती है।
हालांकि, बैंकों द्वारा दिए गए कुल वाणिज्यिक ऋण में 14 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। इसका अर्थ यह है कि बैंक अपने मौजूदा ग्राहकों को अधिक ऋण प्रदान कर रहे हैं, जबकि नए उधारकर्ताओं के लिए रास्ता संकीर्ण होता जा रहा है।
डिप्टी गवर्नर का यह विश्लेषण सुझाता है कि भारतीय बैंकों को अपनी डिजिटल बुनियादी ढांचे में सुधार करने की आवश्यकता है ताकि छोटे उद्योगों और नए उद्यमियों तक पहुंचना आसान हो सके। वर्तमान रुझान अर्थव्यवस्था में समावेशी वृद्धि के लिए चिंता का विषय माना जा रहा है।