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मैसूर दशहरे की रोशनी के पीछे 642 कर्मियों का अथक परिश्रम
मैसूर शहर को त्योहारी चमक से जगमगाने के लिए कर्नाटक विद्युत वितरण कंपनी के सैकड़ों कर्मचारी दिन-रात परिश्रम करते हैं। विद्युत आपूर्ति व्यवस्था को सुचारु रखने के लिए 642 कर्मी तैनात रहते हैं।
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मैसूर दशहरे की भव्यता और रोशनी सिर्फ उत्सव प्रेमियों के लिए ही नहीं, बल्कि हजारों तकनीकी कर्मियों के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण होती है। शहर को पूरी तरह रोशन रखने और विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कर्नाटक विद्युत वितरण कंपनी (CESC) के 642 कर्मचारी अक्सर पर्दे के पीछे से काम करते हैं।
ये कर्मी विद्युत नेटवर्क के हर कोने की निगरानी करते हैं, ट्रांसफॉर्मर की जांच करते हैं और संभावित खराबियों को दूर करते हैं। दशहरे के दौरान शहर के सभी प्रमुख इलाकों, मंदिरों, सार्वजनिक स्थलों और सजावट के क्षेत्रों में बिजली की माँग अचानक बढ़ जाती है। ऐसे समय में किसी भी तरह की बिजली कटौती से महोत्सव की खूबसूरती धूमिल हो सकती है।
CESC की टीम 24 घंटे आपातकालीन सेवाएं सक्रिय रखती है ताकि किसी भी आपदा या विद्युत व्यवधान का तुरंत समाधान किया जा सके। लाइनमैन, तकनीशियन और पर्यवेक्षक सभी मिलकर यह सुनिश्चित करते हैं कि त्योहार के दौरान मैसूर कभी अंधेरे में न रहे।
यह पर्दे के पीछे का प्रयास ही है जो दशहरे को इतना रोशन और भव्य बनाता है। हजारों आगंतुक और स्थानीय निवासी जब मैसूर के चमकते-दमकते रूप को देखते हैं, तो वे शायद ही इन अदृश्य कर्मियों के योगदान को समझते हैं जो इस चमक को बनाए रखने के लिए अथक परिश्रम करते हैं।