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वाराणसी में लगा शुगर-टू-प्लास्टिक प्रोजेक्ट का विशालकाय रिएक्टर
बेल्जियम से आयातित ₹10 करोड़ की मूल्यवान 'बाहुबली मशीन' वाराणसी पहुंची है जो चीनी से जैव-प्लास्टिक का निर्माण करेगी। ₹3000 करोड़ की इस महत्वाकांक्षी परियोजना ने स्थानीय नागरिकों का ध्यान आकर्षित किया है।
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वाराणसी में एक अभूतपूर्व औद्योगिक परियोजना की नींव रखी जा रही है। बेल्जियम से आयातित एक विशालकाय रिएक्टर, जिसे स्थानीय स्तर पर 'बाहुबली मशीन' के नाम से संबोधित किया जा रहा है, शहर में पहुंच गया है। यह अत्याधुनिक उपकरण चीनी (शुगर) को बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक में रूपांतरित करने की क्षमता रखता है।
₹10 करोड़ की किराये की लागत वाली इस मशीन को एक विशाल ट्रेलर पर शहर तक पहुंचाया गया है। परियोजना की कुल अनुमानित लागत ₹3000 करोड़ है और यह क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण औद्योगिक विकास माना जा रहा है। इस तकनीकी उपलब्धि के माध्यम से भारत पारंपरिक प्लास्टिक के विकल्पों की ओर अग्रसर हो रहा है।
मशीन के आगमन से स्थानीय जनता में उत्सुकता देखी गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना न केवल रोजगार सृजन करेगी, बल्कि पर्यावरण के अनुकूल उत्पादन प्रक्रिया को बढ़ावा देगी। जैव-प्लास्टिक का उपयोग पारंपरिक प्लास्टिक प्रदूषण को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।