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दशहरे में अभिमन्यु को भावुक विदाई, आखिरी बार निशानेदार के रूप में भीड़ ने दी तापस
अभिमन्यु ने दशहरे के जुलूस में निशानेदार की भूमिका निभाते हुए अपनी अंतिम परंपरागत उपस्थिति दर्ज की। रास्ते भर बड़ी भीड़ ने उन्हें भावुक स्वागत और विदाई दी।
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दक्षिण भारत के एक प्रमुख शहर में आयोजित दशहरे के जुलूस में अभिमन्यु ने निशानेदार की हैसियत से भीड़ को मुग्ध किया। इस परंपरागत भूमिका में उनकी आखिरी परिक्रमा को लेकर स्थानीय समुदाय में एक भावुक माहौल था।
अभिमन्यु के नेतृत्व में जुलूस जब शहर की प्रमुख सड़कों से गुजरा, तो हजारों लोगों ने उन्हें गर्मजोशी से स्वागत किया। दर्शकों की भीड़ ने उन्हें एक लंबे कार्यकाल के लिए सम्मानित करने का प्रयास किया। परंपरा के वाहक के रूप में उनकी भूमिका को इस बार विशेष महत्व दिया गया।
दशहरे का यह जुलूस न केवल सांस्कृतिक महत्व का था, बल्कि अभिमन्यु के लिए एक ऐतिहासिक क्षण भी साबित हुआ। निशानेदार की भूमिका निभाते हुए शहर भर की यात्रा में स्थानीय नागरिकों की भरपूर उपस्थिति यह दर्शाती थी कि वह समुदाय के लिए कितने महत्वपूर्ण हैं।
इस संवेदनशील विदाई के साथ एक परंपरागत युग का अंत हो रहा है। अभिमन्यु की दशकों की सेवा और समर्पण को भीड़ की तालियों और आशीर्वाद में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता था।