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जलपाईगुड़ी अदालत ने दोषी को दी मौत की सजा, बच्चों की देखभाल का निर्देश
जलपाईगुड़ी की अतिरिक्त सत्र अदालत ने एक व्यक्ति को मौत की सजा सुनाते हुए माना कि माता-पिता के अपराध बच्चों पर नहीं पड़ने चाहिए। अदालत ने जिला प्रशासन को दोषी के नाबालिग बेटों की शिक्षा और कल्याण सुनिश्चित करने का आदेश दिया है।
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जलपाईगुड़ी की अतिरिक्त सत्र अदालत ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है जिसमें दोषी को मौत की सजा दी गई है, लेकिन साथ ही बच्चों के अधिकारों के प्रति संवेदनशीलता प्रदर्शित की गई है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश बिप्लब राय ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया कि माता-पिता के पाप उनके बच्चों पर नहीं पड़ सकते।
न्यायाधीश राय के अनुसार, राज्य का यह दायित्व है कि वह बच्चों के भविष्य, विशेषकर उनकी शिक्षा के प्रति सचेष्ट रहे। इस मामले में दोषी के दो नाबालिग पुत्र हैं, जिनके कल्याण की जिम्मेदारी अब अदालत ने स्पष्ट रूप से सरकार को सौंप दी है।
अदालत ने जलपाईगुड़ी के जिला प्रशासक को निर्देश दिया है कि वह इन दोनों बच्चों की शारीरिक और मानसिक भलाई सुनिश्चित करें। साथ ही, उनकी शिक्षा जारी रखने के लिए आवश्यक प्रबंध भी किए जाएं। यह फैसला बाल अधिकारों की सुरक्षा और न्यायिक व्यवस्था की संवेदनशीलता का प्रमाण है।
इस प्रकार का निर्णय दर्शाता है कि भारतीय न्यायपालिका किस प्रकार अपराधी को दंड देते हुए भी निर्दोष बच्चों के भविष्य की चिंता करती है। अदालत का यह कदम सामाजिक जिम्मेदारी और बाल कल्याण के प्रति प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।