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बेंगलुरु में गणेश मूर्ति निर्माताओं के सामने मिट्टी या प्लास्टर का दुविधा
बेंगलुरु के गणेश मूर्ति निर्माता और विक्रेता परंपरागत मिट्टी और आधुनिक प्लास्टर ऑफ पेरिस के बीच चुनाव को लेकर असमंजस में हैं। पर्यावरणीय और आर्थिक दोनों कारणों से यह फैसला उनके लिए महत्वपूर्ण हो गया है।
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बेंगलुरु में गणेश चतुर्थी की तैयारी के बीच स्थानीय मूर्ति निर्माता और व्यापारियों को एक कठोर निर्णय लेना पड़ रहा है। परंपरागत मिट्टी से बनी मूर्तियों और आधुनिक प्लास्टर ऑफ पेरिस के विकल्पों के बीच चुनाव करना उनके लिए आर्थिक और पर्यावरणीय दोनों ही दृष्टि से चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है।
मिट्टी से बनी मूर्तियां पर्यावरण के अनुकूल तो होती हैं, लेकिन इनकी निर्माण प्रक्रिया समय साध्य और श्रम प्रधान है। वहीं प्लास्टर ऑफ पेरिस से बनी मूर्तियां तेजी से बनाई जा सकती हैं और इनकी बाजार मांग भी अधिक है। इससे व्यापारियों की आय में महत्वपूर्ण अंतर आता है।
परंपरागत कारीगरों का मानना है कि मिट्टी की मूर्तियां पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचाती हैं क्योंकि ये प्राकृतिक सामग्री से बनी होती हैं। हालांकि, प्लास्टर ऑफ पेरिस की मूर्तियों का निपटान समस्याग्रस्त साबित होता है। कई निर्माता अब दोनों विकल्पों का मिश्रण कर रहे हैं ताकि वे गुणवत्ता और पर्यावरण के बीच संतुलन बना सकें।
स्थानीय सरकार भी पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए कुछ दिशानिर्देश जारी करे इस बारे में चर्चा चल रही है। बेंगलुरु के कारीगरों का कहना है कि यदि उन्हें उचित समर्थन और प्रोत्साहन दिया जाए तो वे पूरी तरह पर्यावरण अनुकूल मूर्तियों की ओर बढ़ सकते हैं।