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बेंगलुरु में स्कूलों का विवादास्पद 'अलिखित नियम': गृहणी माताओं के बच्चों को प्राथमिकता
बेंगलुरु के एक अभिभावक ने स्कूलों द्वारा अपनाए जाने वाले भेदभावपूर्ण प्रथाओं का खुलासा किया है। कार्यरत माताओं के बच्चों की तुलना में घरेलू माताओं के बच्चों को अधिक प्राथमिकता दी जाती है।
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बेंगलुरु के एक माता-पिता ने शैक्षणिक संस्थानों में व्याप्त एक गंभीर समस्या की ओर ध्यान आकर्षित किया है। उनके अनुसार, शहर के कई स्कूलों में एक अघोषित नियम मौजूद है जो गृहणी माताओं के बच्चों को कामकाजी माताओं के बच्चों की तुलना में विशेषाधिकार देता है। यह प्रथा स्कूल प्रशासन द्वारा औपचारिक रूप से स्वीकार नहीं की जाती, लेकिन अभिभावकों के बीच इसका व्यापक अनुभव है।
इस मुद्दे को उजागर करने वाले माता-पिता का मानना है कि यह भेदभाव विभिन्न पहलुओं में दिखाई देता है, जिसमें स्कूल गतिविधियों में भागीदारी, छात्र प्रतिनिधित्व और विभिन्न अवसरों का आवंटन शामिल है। कामकाजी माताओं के बच्चों को अक्सर स्कूल के कार्यक्रमों और समारोहों में कम प्राथमिकता मिलती है।
इस अभिभावक का कहना है कि यह प्रथा न केवल असमान है बल्कि आधुनिक समाज के मूल्यों के विपरीत भी है, जहां महिलाएं पेशेवर क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। उन्होंने इस मामले को शैक्षणिक नीति निर्माताओं और स्कूल प्रशासकों के सामने उठाने की मांग की है।
यह घटना बेंगलुरु जैसे महानगरीय क्षेत्र में लिंग आधारित भेदभाव की व्यापक समस्या को उजागर करती है। शिक्षा विशेषज्ञ और अधिकार कार्यकर्ता इस तरह की प्रथाओं को चुनौती देने और सभी बच्चों को समान अवसर सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दे रहे हैं।