Politics · India Bureau
बेंगलुरु: नए प्रशासनिक ढांचे में कर्मचारियों की कमी से सेवा देने में चुनौती
बेंगलुरु में नए शासन ढांचे के तहत पांच निगमों का गठन किया गया है, लेकिन पहले जैसी कर्मचारी संख्या न होने से जनसेवा में बाधा आ रही है। सितंबर 2025 से लागू ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी सहित यह नया तंत्र जमीन पर अपनी जिम्मेदारियां पूरी करने में जूझ रहा है।
LSN India ·

कर्नाटक सरकार ने 2025 में ब्रिहत् बेंगलुरु महानगर पालिका अधिनियम, 2020 को निरस्त करके ग्रेटर बेंगलुरु गवर्नेंस अधिनियम, 2024 को लागू किया है। इस नए ढांचे में बीबीएमपी को भंग कर दिया गया और इसकी जगह पांच स्वतंत्र निगमों का गठन किया गया है। साथ ही, पूरे शहर के लिए ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी (जीबीए) नामक एक छतरी संगठन बनाया गया है, जो 2 सितंबर, 2025 से कार्यरत है।
नई व्यवस्था में वार्डों की संख्या बढ़ाई गई है, लेकिन प्रशासनिक कर्मचारियों की संख्या पूर्ववत रही है। इससे विभिन्न निगमों और जीबीए को जनसेवाओं को प्रभावी तरीके से संचालित करने में गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
विश्लेषकों का मानना है कि सीमित जनशक्ति के साथ अधिक वार्डों की जिम्मेदारी संभालना नगर प्रशासन के लिए एक बड़ी समस्या साबित हो रहा है। नालियों की सफाई से लेकर लाइसेंस जारी करने तक विभिन्न कार्यों में विलंब देखा जा रहा है।
शहर के विभिन्न इलाकों से नागरिकों की शिकायतें बढ़ी हैं कि सड़कों की मरम्मत, कचरा प्रबंधन और अन्य बुनियादी सेवाओं में ध्यान नहीं दिया जा रहा। प्रशासनिक विशेषज्ञों का सुझाव है कि नई व्यवस्था को सफल बनाने के लिए तत्काल कर्मचारियों की भर्ती आवश्यक है।