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जीडीपी से परे: खुशहाली को नापने के नए तरीके

क्या भारत और दक्षिण एशिया आर्थिक विकास के पारंपरिक मापदंडों से परे जा रहे हैं? विशेषज्ञ अब सकल घरेलू उत्पाद के विकल्प के रूप में जनता की खुशहाली और कल्याण को प्राथमिकता देने की ओर ध्यान दे रहे हैं।

LSN India · 3 November 2026

जीडीपी से परे: खुशहाली को नापने के नए तरीके

दशकों से राष्ट्रीय विकास को मापने का मुख्य आधार सकल घरेलू उत्पाद रहा है। हालांकि, विश्व स्तर पर एक महत्वपूर्ण बदलाव दिख रहा है जहां नीति निर्माता और अर्थशास्त्री जनता के वास्तविक कल्याण को अधिक महत्व दे रहे हैं।

पारंपरिक आर्थिक विकास के मापदंड अक्सर आय और भौतिक संपत्ति तक सीमित रहते हैं, जबकि स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यावरण और सामाजिक सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं को नजरअंदाज करते हैं। इसी विसंगति को समझने के लिए विशेषज्ञों ने जनकल्याण सूचकांकों के विकल्प प्रस्तावित किए हैं।

गुटान जैसे देशों ने "राष्ट्रीय खुशहाली सूचकांक" जैसे नवीन उपायों को लागू किया है, जो मानसिक स्वास्थ्य, सांस्कृतिक संरक्षण और पर्यावरणीय स्थिरता को प्राथमिकता देते हैं। इस अवधारणा दक्षिण एशिया में भी गति पकड़ रही है।

विशेषज्ञ मानते हैं कि खुशहाली-केंद्रित नीतियों को अपनाना टिकाऊ विकास के लिए आवश्यक है। इससे सरकारें न केवल आर्थिक वृद्धि पर बल्कि नागरिकों के समग्र जीवन की गुणवत्ता में सुधार पर भी ध्यान केंद्रित कर सकती हैं।