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गेहूं से परे: पोषक अनाजों की रोटियां स्वास्थ्य के लिए बेहतर विकल्प

पारंपरिक गेहूं की रोटी के अलावा कई अन्य अनाजों से तैयार की जाने वाली रोटियां न केवल स्वाद में भिन्न होती हैं, बल्कि पोषण के लिहाज से भी अधिक लाभकारी साबित होती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार दैनिक आहार में इन विकल्पों को शामिल करने से शरीर को आवश्यक पोषक तत्व मिलते हैं।

LSN India · 11 September 2026

गेहूं से परे: पोषक अनाजों की रोटियां स्वास्थ्य के लिए बेहतर विकल्प

भारतीय रसोई में विभिन्न प्रकार के अनाजों का उपयोग सदियों से होता आया है। ज्वार, रागी, बाजरा, मक्का, चना और जौ जैसे अनाजों से बनी रोटियां न केवल पारंपरिक हैं, बल्कि आधुनिक पोषण विज्ञान की दृष्टि से भी अत्यधिक महत्वपूर्ण हैं। ये अनाज गेहूं की तुलना में अधिक फाइबर, प्रोटीन और खनिज तत्वों से भरपूर होते हैं।

ज्वार की रोटी कैल्शियम और आयरन का उत्तम स्रोत मानी जाती है और मधुमेह नियंत्रण में सहायक है। रागी अथवा फिंगर मिलेट में कैल्शियम की मात्रा दूध के बराबर होती है, जिससे हड्डियों को मजबूती मिलती है। बाजरा पाचन क्रिया को सुधारने में कारगर है, जबकि मक्के की रोटी एंटीऑक्सीडेंट्स से समृद्ध होती है।

आहार विशेषज्ञ सुझाते हैं कि साप्ताहिक आहार योजना में इन अनाजों को शामिल करने से भोजन की विविधता बढ़ती है और शरीर को संतुलित पोषण मिलता है। चना और जौ की रोटियां कोलेस्ट्रॉल कम करने में सहायक होती हैं। इन विकल्पों को अपनाने से न केवल स्वास्थ्य लाभ मिलते हैं, बल्कि देश के लघु किसानों को भी आर्थिक मजबूती मिलती है।