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भारत की एकता के लिए खतरा: मोहन भागवत की विभाजनकारी आंदोलनों के खिलाफ चेतावनी
आरएसएस के नेता मोहन भागवत ने भारत को कमजोर करने के लिए सामाजिक विभाजन को गहरा करने की साजिश की चेतावनी दी है। उन्होंने राष्ट्र की एकता और वैश्विक प्रभाव को मजबूत करने के लिए हिंदू मूल्यों पर आधारित एकता का आह्वान किया है।
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आरएसएस के सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा है कि भारत विरोधी शक्तियां देश में सामाजिक विभाजन को गहरा करने का प्रयास कर रही हैं। भागवत ने भारत की वैश्विक स्थिति को कमजोर करने के लिए इन प्रयासों को एक सुनियोजित षड्यंत्र बताया है।
भागवत ने हाल के फ्रांस के तनाव और नेपाल तथा बांग्लादेश की पिछली घटनाओं का संदर्भ देते हुए तर्क दिया है कि शक्तिशाली प्रभावशाली समूह भारत में आंतरिक संघर्ष पैदा करने के लिए काम कर रहे हैं। उन्होंने इस तरह के विभाजनकारी आंदोलनों के खिलाफ सतर्कता बरतने की अपील की है।
आरएसएस के शीर्ष नेता ने राष्ट्र की शक्ति को बनाए रखने के लिए भारतीय मूल्यों और सामूहिक चेतना पर आधारित एकता की आवश्यकता पर जोर दिया है। भागवत के अनुसार, भारत की सांस्कृतिक विरासत और आध्यात्मिक मूल्य सभी नागरिकों को एकजुट करने की शक्ति रखते हैं।
भागवत का यह बयान एक ऐसे समय में आया है जब देश विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर विचार-विमर्श कर रहा है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय हित में सभी को एकजुट रहना चाहिए और विभाजनकारी ताकतों का विरोध करना चाहिए।