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भोपाल में 4.69 करोड़ की टेंडर पर सवाल, अदालत ने पूछा - स्कूलों से पहले फ्लाईओवर क्यों?
भोपाल में एक उच्च न्यायालय की पीठ ने सरकार द्वारा मरम्मत और रखरखाव के लिए नई टेंडर देने पर सवाल उठाए हैं, जबकि ठेकेदार पहले से ही दोषों को सुधारने के लिए बाध्य है।
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भोपाल की एक खंडपीठ ने मरम्मत और रखरखाव कार्यों के लिए सरकार द्वारा 4.69 करोड़ रुपये की नई टेंडर प्रक्रिया पर गंभीर आपत्तियां दर्ज की हैं। न्यायमूर्तियों ने पूछा कि जब मौजूदा ठेकेदार पहले से ही अपनी जिम्मेदारी के तहत निर्माण में पाई गई खामियों को मुफ्त में ठीक करने के लिए बाध्य है, तो नई टेंडर की आवश्यकता क्यों है।
पीठ ने यह भी सवाल उठाया कि क्या सरकार के पास शिक्षा संस्थानों, विशेष रूप से स्कूलों के विकास के लिए इतनी बड़ी राशि उपलब्ध नहीं है। न्यायमूर्तियों की टिप्पणियां सार्वजनिक धन के उपयोग और सरकारी प्राथमिकताओं के बारे में गहरी चिंता को दर्शाती हैं।
अदालत ने सुझाव दिया कि सरकार को पहले पहल मौजूदा ठेकेदार से खामियों को दूर करवाना चाहिए, जो उसके अनुबंध का हिस्सा है। न्यायमूर्तियों ने निर्देश दिए कि यह मामला सुनवाई के लिए अगली तारीख में विस्तृत विश्लेषण के साथ आए।
यह मामला सार्वजनिक परियोजनाओं में जवाबदेही और वित्तीय व्यवस्थापन की व्यापक समस्या पर प्रकाश डालता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी स्थितियों में अदालत का हस्तक्षेप सार्वजनिक धन के दुरुपयोग को रोकने के लिए महत्वपूर्ण है।