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भूटान में हिमनद झील का विस्फोट, भारत के लिए खतरा
भूटान के पहाड़ी इलाकों में हिमनद झीलों के अचानक टूटने से आने वाली बाढ़ भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए गंभीर खतरा बन गई है। जलवायु परिवर्तन के कारण यह घटना तेजी से बढ़ रही है।
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हिमनद झील का विस्फोट एक ऐसी घटना है जिसमें पहाड़ों पर बर्फ के पिघलने से बनी झीलें अचानक टूट जाती हैं और विशाल जलप्रवाह घाटियों में बह जाता है। भूटान के सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश सीमावर्ती क्षेत्रों में इस तरह की झीलें बड़ी संख्या में हैं। ये झीलें बर्फ के तेजी से पिघलने और मोरेन डैम (बर्फ के मलबे से बनी दीवार) के कमजोर होने से बनती हैं।
जब ये झीलें टूटती हैं तो उनसे निकला पानी भारी गति से नीचे की ओर बहता है। इससे घाटियों में भीषण बाढ़ आती है और बड़े पैमाने पर नुकसान हो सकता है। भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में असम, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं क्योंकि भूटान से आने वाली नदियां इन राज्यों से होकर बहती हैं।
वैज्ञानिकों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण हिमालय क्षेत्र में तापमान बढ़ रहा है जिससे हिमनद तेजी से पिघल रहे हैं। इससे नई झीलें बन रही हैं और पुरानी झीलें तेजी से बढ़ रही हैं। ऐसे में हिमनद झील के विस्फोट की घटनाओं में वृद्धि की संभावना है। भारत और भूटान दोनों देश इस खतरे से निपटने के लिए निगरानी प्रणाली और आपातकालीन योजनाएं विकसित कर रहे हैं।