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छठ पर बिहार लौटने का संकट: ट्रेन टिकट दुर्लभ, उड़ानें महंगी
दिवाली और छठ पर्व पर बिहार लौटने वाले प्रवासी श्रमिकों के सामने परिवहन का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। सीमित ट्रेन सीटें, आसमान छूते हवाई किराए और महंगी बस सेवा से यात्रियों के सामने एक कठिन विकल्प खड़ा हो गया है।
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बिहार के प्रवासी श्रमिक जो वर्षों के बाद अपने घर छठ पर्व मनाने जाते हैं, इस बार परिवहन के भीषण संकट का सामना कर रहे हैं। देश के विभिन्न शहरों से बिहार की ओर आने वाली नियमित ट्रेनों में टिकट उपलब्ध नहीं रह गई हैं और कई मार्गों पर वेटिंग लिस्ट पर बुकिंग बंद कर दी गई है।
हवाई परिवहन का विकल्प भी महंगाई का शिकार बन गया है। प्रमुख एयरलाइन्स उड़ानों का किराया 25,000 से 35,000 रुपये तक पहुंच गया है, जिससे मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए यह विकल्प पूरी तरह अव्यवहारिक हो गया है।
बस सेवा हालांकि अपेक्षाकृत सस्ती है, लेकिन लंबी दूरी और परिवार के सभी सदस्यों के लिए टिकट खरीदना भी महत्वपूर्ण खर्च बढ़ा देता है। बस यात्रा में समय भी अधिक लगता है, जिससे यह विकल्प भी वरीयता में पीछे रह जाता है।
इन सभी कारकों के बीच, प्रवासियों के लिए अपने स्वजनों के बीच छठ पर्व मनाने की यह यात्रा एक बड़ी आर्थिक चुनौती बन गई है। परिवहन के सभी विकल्पों में लागत और सुविधा दोनों ही समस्याएं खड़ी हैं।