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बिहार में राजमार्गों के निर्माण में नदी की सिल्ट का उपयोग, बाढ़ नियंत्रण की नई पहल
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण बिहार में राजमार्ग निर्माण के लिए नदी की सिल्ट का इस्तेमाल करने की योजना बना रहा है। इस कदम से बाढ़ के जोखिम को कम करने के साथ-साथ कृषि भूमि पर निर्माण सामग्री के लिए निर्भरता भी घटेगी।
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बिहार में बार-बार आने वाली बाढ़ की समस्या से निपटने के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) एक नई रणनीति अपना रहा है। प्राधिकरण नदियों से निकली सिल्ट को राजमार्ग निर्माण परियोजनाओं में उपयोग करने की योजना बना रहा है, जिससे दो मुद्दों का एक साथ समाधान हो सकेगा।
इस पहल से नदियों के तल में जमा सिल्ट को निकालने से बाढ़ की समस्या कम होगी क्योंकि सिल्ट के जमा होने से नदी की जल धारण क्षमता प्रभावित होती है। साथ ही, राजमार्ग निर्माण के लिए आवश्यक निर्माण सामग्री का एक विकल्प मिल जाएगा। यह उपाय कृषि भूमि से बड़े पैमाने पर खनन कार्य को कम करने में भी मदद करेगा।
बिहार का भौगोलिक स्थान, विशेषकर गंगा और इसकी सहायक नदियों के निकट होने के कारण, राज्य को मानसून के मौसम में गंभीर बाढ़ का सामना करना पड़ता है। सिल्ट को राजमार्ग निर्माण में शामिल करना एक व्यावहारिक समाधान है जो पर्यावरण और बुनियादी ढांचे विकास दोनों को ध्यान में रखता है।
एनएचएआई की इस योजना से बिहार के राजमार्ग नेटवर्क को मजबूत करने के साथ-साथ नदी प्रबंधन में भी सुधार आने की संभावना है। यह पहल बाढ़ नियंत्रण, राजमार्ग विकास और कृषि भूमि संरक्षण के बीच एक संतुलन बनाने का प्रयास है।