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लोकसभा स्पीकर ने ऑडिटिंग में तकनीक के उपयोग पर जोर दिया
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने ऑडिटिंग प्रक्रियाओं में आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल की वकालत की है। वहीं, केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के करीबी सहयोगी सथीश ने मौजूदा ऑडिटिंग पद्धतियों में खामियों को लेकर चिंता जताई है।
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लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने विभिन्न ऑडिटिंग संस्थानों से सुशासन और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए डिजिटल प्रौद्योगिकी को अपनाने का आह्वान किया है। बिड़ला का मानना है कि आधुनिक तकनीकी समाधान ऑडिटिंग प्रक्रिया को अधिक कुशल, पारदर्शी और विश्वसनीय बना सकते हैं। उन्होंने जोर दिया है कि वित्तीय निरीक्षण और लेखा परीक्षा में तकनीकी हस्तक्षेप भारतीय संस्थानों को अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप लाने में मदद कर सकता है।
इसी दौरान, केरल सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने मौजूदा ऑडिटिंग पद्धतियों में गंभीर खामियों की ओर ध्यान आकर्षित किया है। सथीश ने कहा कि परंपरागत तरीकों से संचालित ऑडिटिंग में विसंगतियां और त्रुटियों की संभावना अधिक रहती है। उन्होंने यह भी कहा कि पुरानी ऑडिटिंग प्रणाली को संभवतः नई तकनीक के माध्यम से सुधार की आवश्यकता है।
इस मुद्दे पर बिड़ला और सथीश दोनों ही सहमत दिखाई दिए कि भारतीय ऑडिटिंग संस्थानों को अपनी कार्यप्रणाली में सुधार की आवश्यकता है। बिड़ला की टिप्पणियां बताती हैं कि केंद्रीय स्तर पर भी इस मुद्दे को गंभीरता से लिया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डेटा विश्लेषण जैसी तकनीकों का उपयोग ऑडिटिंग प्रक्रिया में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है।