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मंगल के लिए बनाया गया ड्रोन, अब सेना करेगी परीक्षण
बिट्स पिलानी के छात्रों ने जीपीएस के बिना काम करने वाली ड्रोन तकनीक विकसित की है। यह अभूतपूर्व प्रणाली अब भारतीय सेना द्वारा परीक्षण के लिए तैयार है।
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बिट्स पिलानी के इंजीनियरिंग छात्रों की टीम ने एक क्रांतिकारी ड्रोन प्रणाली विकसित की है जो पारंपरिक जीपीएस तकनीक पर निर्भर नहीं है। यह अत्याधुनिक तकनीक मूलतः मंगल ग्रह पर संचालन के लिए डिजाइन की गई थी, जहां पृथ्वी आधारित जीपीएस सिस्टम काम नहीं करता। अब यह प्रणाली भारतीय सेना के ध्यान में आई है जो इसकी सैन्य अनुप्रयोगों की संभावनाओं का आकलन कर रही है।
जीपीएस-मुक्त नेविगेशन प्रणाली का विकास एक महत्वपूर्ण तकनीकी उपलब्धि है। इस तकनीक को उपग्रह संचार पर निर्भर हुए बिना सटीक नेविगेशन प्रदान करने के लिए तैयार किया गया है। इससे ऐसे क्षेत्रों में ड्रोन का संचालन संभव हो सकता है जहां पारंपरिक जीपीएस सेवाएं अनुपलब्ध या अविश्वसनीय हों।
भारतीय सेना की ओर से इस प्रणाली में रुचि दिखाना देश की सैन्य क्षमताओं को बढ़ाने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है। ऐसी तकनीकें सीमावर्ती क्षेत्रों में टोही और निगरानी कार्यों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती हैं। बिट्स पिलानी के शोधकर्ताओं का यह प्रयास भारतीय युवा प्रतिभा की सैन्य और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में क्षमता को प्रदर्शित करता है।
यह विकास दर्शाता है कि कैसे अंतरिक्ष अनुसंधान से संबंधित तकनीकें पृथ्वी पर भी व्यावहारिक अनुप्रयोग खोज सकती हैं। सेना द्वारा इस ड्रोन तकनीक के परीक्षण से देश की रक्षा क्षमताओं में नई संभावनाएं सामने आ सकती हैं।