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भाजपा विधायकों ने खनन कानून में बदलाव कर ओडिशा के हितों को नुकसान पहुंचाया: बीजेडी
बीजेडी सांसद संतृप्त मिश्रा ने आरोप लगाया कि भाजपा के समर्थन से खनन कानून संशोधन ओडिशा के लिए आर्थिक नुकसान का कारण बने। महाधिवक्ता की सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में राज्य के एक लाख करोड़ रुपये के बकाये की वैधता स्वीकार की गई थी।
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ओडिशा के विधायिका से खनन कानून में किए गए संशोधन पर विवाद गहरा हुआ है। बीजेडी सांसद संतृप्त मिश्रा ने भाजपा विधायकों पर राज्य के आर्थिक हितों को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि इन संशोधनों के कारण ओडिशा को महत्वपूर्ण वित्तीय नुकसान हुआ है। मिश्रा के अनुसार, राज्य के पास इस कानूनी विवाद में एक मजबूत मामला है जो सुप्रीम कोर्ट में लंबित है।
राज्य के महाधिवक्ता पितांबर आचार्य ने सुप्रीम कोर्ट में दायर एक हलफनामे में स्पष्ट किया था कि ओडिशा का एक लाख करोड़ रुपये का बकाया वैध दावा है। उन्होंने कहा था कि यह राशि राज्य की न्यायसंगत मांग है और इसे प्राप्त न करने से ओडिशा को गंभीर वित्तीय क्षति होगी। यह रुख राज्य की आधिकारिक स्थिति को प्रतिबिंबित करता है।
बीजेडी का आरोप है कि भाजपा समर्थित खनन कानून संशोधन के माध्यम से ओडिशा के राजस्व को प्रभावित किया गया। पार्टी का मानना है कि इन कदमों ने राज्य की आर्थिक रिकवरी में बाधा डाली है। यह विवाद केंद्र-राज्य संबंधों और प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन के मुद्दों को केंद्र में रखता है।
इस मामले का सुप्रीम कोर्ट में समाधान होने की संभावना है, जहां ओडिशा की वित्तीय दावेदारी की जांच की जा रही है। राज्य सरकार का कहना है कि खनन क्षेत्र से राजस्व उसके विकास परियोजनाओं के लिए महत्वपूर्ण है।