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मनुस्मृति पर राहुल गांधी की टिप्पणियों को लेकर भाजपा नेताओं में विवाद
महाराष्ट्र में महिला छात्राओं को संबोधित करते हुए कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मनुस्मृति की आलोचना की और महिलाओं की आत्मनिर्भरता पर जोर दिया। इसके बाद से भाजपा के नेताओं ने उनकी बयानबाजी पर सवाल उठाए हैं।
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महाराष्ट्र में महिला छात्राओं के साथ एक कार्यक्रम में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने मनुस्मृति की 'मानसिकता' के खिलाफ कड़ी आलोचना की है। उन्होंने युवा महिलाओं से पितृसत्ता को समाप्त करने का आह्वान किया और कहा कि महिलाएं अपने पिता, पति या पुत्रों की नहीं, बल्कि केवल अपनी ही होती हैं। गांधी का यह भाषण महिलाओं के अधिकारों और सामाजिक समानता पर उनके विचारों को प्रतिफलित करता है।
राहुल गांधी की इन टिप्पणियों के बाद भाजपा के कई शीर्ष नेताओं ने उनके वक्तव्य पर सवाल उठाना शुरू कर दिया है। सत्तारूढ़ दल के नेताओं का मानना है कि गांधी की बयानबाजी न केवल भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों की आलोचना करती है बल्कि धार्मिक भावनाओं को भी ठेस पहुंचाती है।
भाजपा के प्रवक्ताओं ने आरोप लगाया है कि कांग्रेस की राजनीति परंपरा-विरोधी विचारधारा पर आधारित है। उन्होंने कहा है कि राहुल गांधी भारतीय परंपरा और संस्कृति को नकारने का प्रयास कर रहे हैं। दोनों पक्षों के बीच इस बहस ने सामाजिक माध्यमों पर भी व्यापक चर्चा को जन्म दिया है।
इस विवाद के बीच महिला अधिकार कार्यकर्ताओं के एक वर्ग ने गांधी के विचारों को महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक सकारात्मक कदम बताया है, जबकि सांस्कृतिक संरक्षणवादियों का कहना है कि ऐसे विचार भारतीय सामाजिक ताने-बाने को क्षति पहुंचाते हैं।