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राज्यसभा टिकट से नाराज कश्यप, BJP छोड़ने की तैयारी में
बारह साल पहले मेनका-वरुण गांधी की सीटें बदलकर आगे बढ़ाए गए धर्मेंद्र कश्यप अब भाजपा के लिए संकट बनते दिख रहे हैं। राज्यसभा टिकट न मिलने से नाराज कश्यप समाजवादी पार्टी की ओर जाने की चर्चाएं रुहेलखंड में तेजी पकड़ रही हैं।
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रुहेलखंड की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ आने वाला है। धर्मेंद्र कश्यप, जिन्हें भाजपा ने 2012 में मेनका गांधी और वरुण गांधी की सीटें बदलकर आगे बढ़ाया था, अब पार्टी से दूर होते दिख रहे हैं। राज्यसभा में टिकट न मिलने से नाराज कश्यप के समाजवादी पार्टी के साथ जुड़ने की संभावनाएं तेजी से बढ़ रही हैं।
कश्यप की संभावित पार्टी परिवर्तन से भाजपा को रुहेलखंड क्षेत्र में गंभीर नुकसान हो सकता है। इस क्षेत्र में पार्टी की सामाजिक संरचना को बनाने में कश्यप की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उनके प्रस्थान से भाजपा की 'सामाजिक इंजीनियरिंग' रणनीति पर असर पड़ने की चिंता बढ़ गई है।
राज्यसभा टिकट की मांग को लेकर कश्यप पार्टी नेतृत्व से नाराज हैं। उनके अनुसार, दशकों की सेवा के बाद उचित सम्मान नहीं मिलना अस्वीकार्य है। यह विवाद भाजपा के आंतरिक प्रबंधन के मुद्दों को उजागर करता है और पार्टी की एकता पर सवाल खड़े करता है।
कश्यप का संभावित कदम विपक्षी दलों को मजबूत बना सकता है। समाजवादी पार्टी जैसे विरोधी गठजोड़ को उनके जैसे अनुभवी नेता से लाभ हो सकता है। यह स्थिति भाजपा को आंतरिक संकट से जूझने के लिए मजबूर कर सकती है।