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मोदी के 12 साल: भाजपा का रूपांतरण चुनावी शक्ति केंद्र में
नरेंद्र मोदी के डेढ़ दशक के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी एक पारंपरिक कैडर संगठन से चुनावी प्रभुत्व की राष्ट्रीय शक्ति में परिणत हुई है। सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और लाभार्थी-केंद्रित नीति के जरिए भाजपा ने 21 राज्यों में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है।
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भारतीय जनता पार्टी का संगठनात्मक ढांचा और राजनीतिक रणनीति पिछले बारह वर्षों में उल्लेखनीय परिवर्तन से गुजरी है। नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली पार्टी ने पारंपरिक राजनीतिक समीकरणों से हटकर एक व्यापक चुनावी आधार तैयार किया है जो विविध सामाजिक समूहों तक विस्तारित है।
पार्टी की सफलता का एक प्रमुख कारण इसके सामाजिक संगठन की रणनीति रही है। सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को केंद्रीय विचार के रूप में प्रस्तुत करते हुए, भाजपा ने परंपरागत जातिगत सीमारेखाओं को पार करने का प्रयास किया है। साथ ही, सरकारी लाभ योजनाओं और कल्याणकारी उपायों के माध्यम से विभिन्न वर्गों तक पहुंचना भी इसकी रणनीति का अभिन्न अंग बन गया है।
इस राजनीतिक विस्तार का परिणाम भाजपा की भौगोलिक पकड़ में स्पष्ट दिखाई देता है। देश के 21 राज्यों में पार्टी की सत्ता स्थापित हुई है, जो इसके व्यापक जनाधार का सूचक है। चुनाव-दर-चुनाव इस वृद्धि की गति ने भाजपा को भारतीय राजनीति में एक प्रभावशाली खिलाड़ी के रूप में प्रतिष्ठित किया है।
शक्तिशाली संगठनात्मक संरचना और गतिशील नेतृत्व के मेल ने भाजपा को परंपरागत राजनीतिक दलों से अलग कर दिया है। इस अवधि में पार्टी के विकास का क्रम न केवल चुनावी सफलताओं में बल्कि इसकी सामाजिक पहुंच और संगठनात्मक क्षमता में भी परिलक्षित होता है।