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मराठी भाषा सीखने के लिए टैक्सी चालकों को एक साल की अतिरिक्त मुहलत
बंबई हाई कोर्ट ने टैक्सी और ऑटो चालकों द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया है। महाराष्ट्र सरकार ने मराठी भाषा सीखने के लिए निर्धारित समय में एक साल की वृद्धि करने का निर्णय लिया है।
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बंबई हाई कोर्ट ने मंगलवार को टैक्सी और ऑटो रिक्शा चालकों द्वारा दायर एक याचिका को खारिज कर दिया है जिसमें मराठी भाषा सीखने की अनिवार्य आवश्यकता को चुनौती दी गई थी। अतिरिक्त सरकारी प्लीडर ज्योति चावण ने अभिनय मुख्य न्यायाधीश रवींद्र घुगे और न्यायाधीश गौतम अंखड़ की बेंच को बताया कि राज्य सरकार ने चालकों को भाषा सीखने के लिए दी जाने वाली अवधि में एक साल की वृद्धि करने का निर्णय लिया है।
सरकार की ओर से प्रस्तुत इस प्रस्ताव का उद्देश्य टैक्सी और ऑटो चालकों को अपनी भाषा कौशल विकसित करने के लिए अतिरिक्त समय प्रदान करना है। यह निर्णय मराठी भाषा को महाराष्ट्र में बेहतर ढंग से लागू करने की राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
यह विस्तार उन चालकों के लिए राहत की बात है जिन्हें मराठी सीखने में कठिनाई हो रही थी। राज्य सरकार का यह कदम भाषा की अनिवार्यता को लागू करते हुए वास्तविक परिस्थितियों और चालकों की क्षमता को भी ध्यान में रखता है।
कोर्ट ने इस नई समयावधि को स्वीकार करते हुए मामले को निपटा दिया है। इस अवधि के दौरान चालकों को मराठी भाषा में दक्षता हासिल करने का पूरा अवसर मिलेगा।