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बॉम्बे हाईकोर्ट ने छात्रा के खिलाफ एफआईआर को रद्द किया, कहा पुनः पोस्ट करना ही भूमिका थी
बॉम्बे हाईकोर्ट ने माना कि विवादास्पद ऑपरेशन सिंदूर पोस्ट को लेकर एफआईआर दर्ज छात्रा की भूमिका सीमित थी। न्यायालय ने नोट किया कि आरोपी पहले से ही हिरासत में रह चुकी है।
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बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक छात्रा के खिलाफ दर्ज प्रथम सूचना रिपोर्ट को रद्द कर दिया है। यह मामला विवादास्पद ऑपरेशन सिंदूर पोस्ट के शेयर किए जाने से जुड़ा हुआ था। न्यायालय ने अपने फैसले में कहा कि छात्रा की भूमिका केवल सामग्री को दोबारा पोस्ट करने तक सीमित थी।
हाईकोर्ट ने यह भी माना कि प्रश्नगत छात्रा पहले से ही पुलिस हिरासत में रह चुकी है। न्यायालय के अनुसार, उस पर पहले से ही पर्याप्त कानूनी कार्रवाई हो चुकी है। इसी कारण से कोर्ट ने मामले में आगे की कार्रवाई को स्वीकार नहीं किया।
यह फैसला छात्र समुदाय के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें सोशल मीडिया पर साझा की गई सामग्री की जिम्मेदारी पर प्रकाश डाला गया है। न्यायालय का मानना है कि केवल किसी सामग्री को साझा करना एक गंभीर आपराधिक कार्य नहीं माना जा सकता।
इस निर्णय से संबंधित विधिक विशेषज्ञों का कहना है कि यह सोशल मीडिया पर व्यक्तिगत जिम्मेदारी के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण निर्णय है। इसमें कोर्ट ने यह संकेत दिया है कि केवल शेयरिंग की क्रिया में किसी को आपराधिक दायित्व के तहत नहीं लाया जा सकता।