Politics · India Bureau
भीड़ द्वारा हत्या के मामले में बॉम्बे उच्च न्यायालय ने जमानत खारिज की
बॉम्बे उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि पीड़ित का आपराधिक रिकॉर्ड भीड़ द्वारा न्याय का औचित्य नहीं ठहरा सकता। अदालत ने कहा कि केवल कानूनी प्रक्रिया ही अपराधियों को दंडित कर सकती है।
LSN India ·

बॉम्बे उच्च न्यायालय ने एक भीड़ द्वारा हत्या के मामले में आरोपियों की जमानत की याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति का आपराधिक अतीत या पूर्व रिकॉर्ड भी उसके खिलाफ भीड़ द्वारा हिंसा या प्रतिशोध के कार्य को वैध नहीं ठहरा सकता।
न्यायालय ने अपने निर्णय में रेखांकित किया कि भारतीय कानूनी व्यवस्था में अपराधियों को दंडित करने का अधिकार केवल न्यायपालिका को है। अदालत ने कहा कि चाहे कोई व्यक्ति किसी भी प्रकार का अपराधी रहा हो, लेकिन उसे भीड़ न्याय के जरिए दंडित करना कानून का उल्लंघन है।
इस फैसले में न्यायालय ने यह भी कहा कि समाज में कानून और व्यवस्था की रक्षा करना और सभी नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा करना राज्य की जिम्मेदारी है। व्यक्तिगत आरोपों या पूर्वाग्रहों के आधार पर किसी को न्याय देने का अधिकार किसी भी व्यक्ति या समूह को नहीं है।
यह निर्णय भीड़ द्वारा की जाने वाली हिंसक कार्रवाइयों के खिलाफ अदालत के सख्त रुख को दर्शाता है। न्यायालय ने जोर दिया कि ऐसे मामलों में कानूनी प्रक्रिया का पालन करना अत्यंत महत्वपूर्ण है और किसी भी परिस्थिति में भीड़ न्याय को स्वीकार नहीं किया जा सकता।