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कंधे को पकड़ना यौन उत्पीड़न नहीं: बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में माना कि किसी के कंधे को पकड़ना यौन उत्पीड़न की श्रेणी में नहीं आता। न्यायाधीश अभय मंत्री की एकल खंडपीठ ने एक FIR को आंशिक रूप से खारिज कर दिया।
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बॉम्बे हाईकोर्ट की एकल खंडपीठ ने एक महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए कहा है कि किसी व्यक्ति के कंधे को पकड़ना यौन उत्पीड़न की परिभाषा में नहीं आता। न्यायाधीश अभय मंत्री की खंडपीठ ने इस आधार पर दर्ज FIR को आंशिक रूप से खारिज कर दिया है।
यह मामला एक ग्राम पंचायत कार्यालय से संबंधित है जहां एक महिला BDO द्वारा शिकायत दर्ज की गई थी। महिला ने अपनी शिकायत में कहा था कि आरोपी कार्यालय में प्रवेश करके उससे झगड़ा करने लगा और फिर उसके दाहिने कंधे को जोर से पकड़कर उसे धक्का दे दिया।
कोर्ट ने अपने निर्णय में विश्लेषण करते हुए माना कि कंधे को पकड़ना और धक्का देना, हालांकि असभ्य व्यवहार है, लेकिन इसे यौन उत्पीड़न की श्रेणी में वर्गीकृत नहीं किया जा सकता। न्यायाधीश ने अन्य प्रासंगिक कानूनी प्रावधानों के तहत मामले की जांच की परिधि को सीमित कर दिया।
यह निर्णय यौन उत्पीड़न की परिभाषा और कानूनी दायरे के संबंध में महत्वपूर्ण मानदंड स्थापित करता है। कोर्ट के अनुसार, यौन उत्पीड़न के आरोपों के लिए कार्यों के पीछे यौन इरादे या सामग्री का होना आवश्यक है।