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मराठी भाषा नियम के विरुद्ध बंबई उच्च न्यायालय में जनहित याचिका
महाराष्ट्र सरकार के परिवहन विभाग द्वारा जारी अगस्त के आदेश को चुनौती दी जा रही है, जिसमें ड्राइवर लाइसेंस के लिए मराठी भाषा ज्ञान अनिवार्य कर दिया गया है।
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बंबई उच्च न्यायालय एक जनहित याचिका की सुनवाई के लिए तैयार है जो महाराष्ट्र मोटर वाहन नियमों में किए गए हाल के संशोधन को चुनौती देती है। याचिका में 12 अगस्त को गृह विभाग (परिवहन) द्वारा जारी किए गए अधिसूचना के विरुद्ध कार्रवाई मांगी जा रही है।
विवादास्पद आदेश के अनुसार, ड्राइवर लाइसेंस प्राप्त करने, उसे नवीनीकृत करने और परमिट धारकों के लिए मराठी भाषा की जानकारी अनिवार्य कर दी गई है। यह शर्त राज्य के नए नियमों का हिस्सा बनाई गई है।
यह मामला भारत में भाषा नीति और रोजगार के अधिकार संबंधी मुद्दों को लेकर महत्वपूर्ण प्रश्न उठाता है। याचिका में दावा किया जा रहा है कि यह प्रावधान संविधान के अंतर्गत नागरिकों के अधिकारों का उल्लंघन करता है।
उच्च न्यायालय की सुनवाई इस बात पर निर्भर करेगी कि क्या राज्य सरकार के पास मोटर वाहन नियमों में भाषागत शर्त जोड़ने का अधिकार है। मामले का निर्णय महाराष्ट्र सहित पूरे देश में भाषा संबंधी नीतियों के लिए एक महत्वपूर्ण निर्धारण कर सकता है।