Politics · India Bureau
बॉम्बे हाईकोर्ट ने ट्रांसजेंडर महिला के खिलाफ बीएनएस धारा 75 के तहत मामले को मंजूरी दी
बॉम्बे उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि यदि कोई व्यक्ति अपनी पहचान महिला के रूप में करता है तो भारतीय न्याय संहिता की धारा 75 उस पर लागू हो सकती है। न्यायाधीश ने यह तर्क खारिज किया कि ट्रांसजेंडर होने के कारण यह धारा लागू नहीं की जा सकती।
LSN India ·

बॉम्बे उच्च न्यायालय ने एक अहम निर्णय देते हुए कहा है कि भारतीय न्याय संहिता की धारा 75 के तहत मामा दर्ज किया जा सकता है यदि शिकायतकर्ता स्वयं को महिला के रूप में पहचानता है। न्यायाधीश की पीठ ने यह स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति का ट्रांसजेंडर होना इस धारा के अनुप्रयोग में बाधा नहीं बन सकता।
मामले में प्रतिवादी पक्ष की ओर से यह तर्क दिया गया था कि चूंकि शिकायतकर्ता ट्रांसजेंडर है, इसलिए धारा 75 उस पर लागू नहीं की जा सकती। हालांकि न्यायालय ने इस तर्क को पूर्णतः अस्वीकार कर दिया और कानूनी व्याख्या में स्पष्टता लाई।
यह निर्णय ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के कानूनी अधिकारों और सुरक्षा के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। न्यायालय ने माना कि लिंग पहचान के आधार पर किसी को कानूनी संरक्षण से वंचित नहीं किया जा सकता।
भारतीय न्याय संहिता की धारा 75 विशेष परिस्थितियों में अपराध के लिए संबंधित प्रावधान रखती है। इस निर्णय से आने वाले समय में समान मामलों में न्यायिक व्यवहार में स्पष्टता आने की उम्मीद है।