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कर्जदार संवैधानिक अधिकार गिरवी नहीं रख सकते: मद्रास उच्च न्यायालय
मद्रास उच्च न्यायालय ने कहा है कि बैंक ऋण चूक करने वाले लोगों को विदेश यात्रा से नहीं रोक सकते। न्यायाधीश वी. लक्ष्मीनारायणन के अनुसार यह संवैधानिक अधिकार का उल्लंघन है।
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मद्रास उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि बैंक और वित्तीय संस्थान ऋण चूक करने वाले व्यक्तियों को विदेश जाने से नहीं रोक सकते, बशर्ते उन पर किसी आपराधिक मामले में आरोप न लगा हो। न्यायमूर्ति वी. लक्ष्मीनारायणन ने अपने निर्णय में कहा कि कर्जदार अपने संवैधानिक अधिकारों को बैंक के साथ गिरवी नहीं रख सकते।
न्यायालय के इस फैसले में कहा गया है कि विदेश यात्रा की स्वतंत्रता भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत एक मौलिक अधिकार है। केवल ऋण की बकाया होना किसी व्यक्ति की आवाजाही पर प्रतिबंध लगाने का कारण नहीं बन सकता। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यह प्रतिबंध केवल तभी लगाया जा सकता है जब किसी के खिलाफ आपराधिक शिकायत दर्ज हो।
यह निर्णय भारतीय बैंकिंग प्रणाली और ऋणदाताओं के लिए एक महत्वपूर्ण दिशानिर्देश प्रदान करता है। मद्रास उच्च न्यायालय का यह रुख सुझाता है कि कानूनी वसूली के तरीकों में संवैधानिक सीमाओं का पालन किया जाना चाहिए। न्यायालय की टिप्पणी से यह स्पष्ट होता है कि नागरिक अधिकारों को आर्थिक लेनदेन के नाम पर निलंबित नहीं किया जा सकता।