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जलवायु नियमों को लेकर BRICS के बीच सवाल, नई दिल्ली घोषणा को मिला महत्व
BRICS देशों की नई दिल्ली घोषणा जलवायु राजनीति के केंद्र में कर्ज, व्यापार और तकनीक को रखती है। विकासशील राष्ट्रों के लिए यह दृष्टिकोण जरूरी माना जा रहा है।
LSN India ·
भारत की अगुवाई में BRICS समूह ने जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए एक अलग दृष्टिकोण प्रस्तुत किया है। नई दिल्ली घोषणा में कहा गया है कि जलवायु संकट का समाधान केवल पर्यावरणीय प्रतिबद्धताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें आर्थिक समानता और तकनीकी सहायता की भूमिका महत्वपूर्ण है।
घोषणा के मुताबिक, विकासशील देशों को जलवायु लक्ष्य हासिल करने के लिए पर्याप्त वित्तीय सहायता मिलनी चाहिए। ऋण प्रबंधन, व्यापार नीतियां और हरित तकनीक का हस्तांतरण इस संदर्भ में केंद्रीय भूमिका निभाते हैं। BRICS का यह रुख विकसित देशों के द्वारा तय किए गए जलवायु नियमों से अलग है।
विश्लेषकों के अनुसार, यह घोषणा दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया के विकासशील देशों की आवाज को मजबूत करती है। जलवायु कार्रवाई को आर्थिक विकास से जोड़कर देखने का यह प्रयास वैश्विक जलवायु वार्ताओं में एक नया आयाम जोड़ता है।
आने वाले महीनों में अंतर्राष्ट्रीय जलवायु सम्मेलनों में BRICS की इस घोषणा का प्रभाव देखा जाएगा। विकासशील देशों के हित की रक्षा करते हुए जलवायु लक्ष्य निर्धारित करने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।